अमेरिकी सपना छीना गया: एच-1बी वीज़ा ‘दुरुपयोग’ पर अमेरिका ने भारत को किया निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नया विज्ञापन जारी किया है, जिसमें कंपनियों पर एच-1बी वीज़ा प्रोग्राम के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। श्रम विभाग (Department of Labour) द्वारा जारी इस विज्ञापन में कहा गया है कि कई अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर युवा अमेरिकी कामगारों की नौकरियां छीन रही हैं — और इसमें भारत को सबसे बड़ा लाभार्थी बताया गया है।
‘अमेरिकन ड्रीम छीना गया’: विज्ञापन का केंद्रीय संदेश
एक पोस्ट में श्रम विभाग ने एक्स (X) प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा,
“युवा अमेरिकियों से उनका अमेरिकन ड्रीम छीन लिया गया है, क्योंकि एच-1बी वीज़ा के दुरुपयोग के कारण उनकी नौकरियां विदेशी कर्मचारियों से भरी जा रही हैं।”
विभाग ने आगे कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और श्रम सचिव लोरी चावेज़-डीरेमर के नेतृत्व में सरकार कंपनियों की जवाबदेही तय कर रही है और “अमेरिकन ड्रीम को फिर से अमेरिकी जनता के लिए वापस ला रही है।”
यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस नीति को दोहराता है, जिसमें अमेरिकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने और विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भरता घटाने पर ज़ोर दिया गया है।
‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ की शुरुआत: वीज़ा सिस्टम की सख्त जांच
इस अभियान के साथ ही श्रम विभाग ने सितंबर 2025 में एक नया कार्यक्रम शुरू किया है — ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ (Project Firewall)। इसका उद्देश्य है एच-1बी वीज़ा नियमों के पालन की जांच करना और उन कंपनियों को रोकना जो इस प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल कर अमेरिकी कर्मचारियों को सस्ते विदेशी कर्मचारियों से बदल देती हैं।
यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, आईटी सेवाओं और इंजीनियरिंग क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां भारतीय पेशेवरों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी मानी जाती है। श्रम विभाग के अनुसार, अब बड़े पैमाने पर ऑडिट और जांचें की जाएंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एच-1बी वीज़ा वास्तव में “विशेष कौशल” की मांग वाली नौकरियों के लिए ही दिए जा रहे हैं और इनसे अमेरिकी नौकरियां प्रभावित न हों।
विज्ञापन का संदेश और प्रतीकात्मक दृश्य
51 सेकंड का यह वीडियो 1950 के दशक के अमेरिका की झलक दिखाता है — उपनगरीय घर, कारखाने और खुशहाल परिवार — और इसके विपरीत आधुनिक समय की सांख्यिकीय वास्तविकताएं रखता है। वीडियो में दावा किया गया है कि एच-1बी वीज़ा के 72 प्रतिशत अनुमोदन भारत के नागरिकों को मिलते हैं, जो असंतुलन का संकेत है।
वीडियो में एक गूंजती हुई आवाज़ कहती है:
“पीढ़ियों से अमेरिकियों को बताया गया कि अगर वे मेहनत करें, तो वे अमेरिकन ड्रीम हासिल कर सकते हैं। लेकिन अब यह सपना कई युवाओं से छिन गया है।”
आवाज़ आगे कहती है कि राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों की ढिलाई ने कंपनियों को वीज़ा प्रणाली का दुरुपयोग करने की अनुमति दी।
वीडियो का अंत इन शब्दों से होता है:
“प्रोजेक्ट फायरवॉल के ज़रिए हम उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं जो एच-1बी वीज़ा का गलत इस्तेमाल करती हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया में अमेरिकियों को प्राथमिकता मिले और अमेरिकन ड्रीम फिर से बहाल हो सके।”
वीडियो का टैगलाइन है — “Recapturing the American Dream for the American People”, यानी “अमेरिकी जनता के लिए अमेरिकन ड्रीम को फिर से हासिल करना।”
राजनीतिक संदेश के साथ आर्थिक संकेत
यह विज्ञापन केवल रोजगार नीति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) नीति की पुनरावृत्ति है, जिसमें घरेलू रोजगार, वेतन वृद्धि और विदेशी श्रम पर निर्भरता कम करने पर बल दिया गया है।
एच-1बी वीज़ा लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों और भारत जैसे देशों के बीच तकनीकी प्रतिभा का पुल बना हुआ है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस प्रणाली का उपयोग कम वेतन देकर अमेरिकी नौकरियों को बाहर के लोगों को देने में किया जा रहा है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि विदेशी पेशेवर, विशेष रूप से भारतीय इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ, अमेरिकी नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उद्योग जगत और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस नए अभियान से अमेरिकी और भारतीय आईटी कंपनियों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांचें और नियम सख्त हुए, तो वीज़ा प्रोसेसिंग में देरी, लागत में वृद्धि और प्रोजेक्ट शेड्यूल पर असर पड़ सकता है।
कई कंपनियों को डर है कि यदि प्रोजेक्ट फायरवॉल को सख्ती से लागू किया गया, तो इससे न केवल अमेरिका के तकनीकी उद्योग की कार्यप्रणाली बदलेगी, बल्कि भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग पर भी दबाव पड़ेगा।
‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा की नई पारी
ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि “अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां पहले” इसका मुख्य उद्देश्य है।
‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ के ज़रिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अब वीज़ा प्रणाली का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और युवा अमेरिकियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे।
“अमेरिकन ड्रीम, फिर से हासिल किया गया” — यह नारा केवल एक भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि एक आर्थिक संकेत भी है कि आने वाले समय में एच-1बी वीज़ा प्रणाली पर सबसे कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
