स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह: भारत की एकमात्र महिला राफेल पायलट, आसमान की शान

भारतीय वायुसेना की एकमात्र महिला राफेल पायलट स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंबाला वायुसेना स्टेशन के दौरे के दौरान उनसे मुलाकात की, जिसके बाद दोनों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।

इस तस्वीर में राष्ट्रपति मुर्मू, भारत की एकमात्र महिला राफेल पायलट के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, जबकि पीछे शक्तिशाली राफेल फाइटर जेट दमकता दिखाई दे रहा है। यह दृश्य न सिर्फ भारतीय वायुसेना की ताकत को दर्शाता है, बल्कि देश में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सशक्तिकरण की कहानी भी कहता है।

बिहार की बेटी से राफेल पायलट तक की उड़ान

शिवांगी सिंह का जीवन संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
15 मार्च 1995 को बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मी शिवांगी ने बचपन में कभी नहीं सोचा था कि वे एक दिन भारत की सबसे उन्नत लड़ाकू विमान की कॉकपिट में बैठेंगी।

उन्होंने सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और आगे मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी), जयपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज के दौरान वे एनसीसी (नेशनल कैडेट कॉर्प्स) की एयर विंग से जुड़ीं, जिसने उनके भीतर उड़ान का सपना जगा दिया।

वह सपना तब हकीकत में बदला जब 2017 में उन्होंने भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया।

मिग-21 से राफेल तक का सफर

शिवांगी ने शुरुआत में मिग-21 बाइसन विमान उड़ाया, जिसे वायुसेना के सबसे चुनौतीपूर्ण और तेज विमान में गिना जाता है।
मिग-21 को “अनुभव की कसौटी” कहा जाता है, क्योंकि इसे उड़ाना आसान नहीं होता। शिवांगी ने इस विमान को बखूबी संभालकर साबित किया कि वे हर कठिनाई का सामना कर सकती हैं।

वर्ष 2020 में उन्हें गोल्डन एरो स्क्वाड्रन में शामिल किया गया, जो फ्रांस से खरीदे गए अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान संचालित करती है। राफेल बेड़े में शामिल होना उनके करियर का बड़ा मुकाम था और भारतीय वायुसेना में महिलाओं की भूमिका के विस्तार का प्रतीक भी।

भारतीय वायुसेना में महिलाओं का नया युग

शिवांगी सिंह की राफेल स्क्वाड्रन में नियुक्ति सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारतीय वायुसेना की सोच में आए बदलाव का प्रमाण थी।
अब महिलाएं केवल प्रशासनिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लड़ाकू मिशनों और अग्रिम पंक्ति के अभियानों में भी योगदान दे रही हैं।

शिवांगी ने इस बदलाव को दिशा दी है और वे उन हजारों युवतियों की प्रेरणा बन चुकी हैं जो अब आसमान को अपना लक्ष्य मान रही हैं।

फर्जी दावों पर वायुसेना की सख्त प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति के दौरे के बाद कुछ समय के भीतर ही पाकिस्तान से जुड़ी सोशल मीडिया साइट्स पर एक झूठी खबर फैल गई। उसमें दावा किया गया कि “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान विंग कमांडर शिवांगी सिंह को “कैद” कर लिया गया है।

भारतीय वायुसेना ने तुरंत इस खबर का स्पष्ट खंडन किया और इसे “पूरी तरह से निराधार और दुष्प्रचार” बताया।
रक्षा अधिकारियों ने कहा कि यह “भ्रामक सूचना फैलाने का सामान्य प्रयास” है, ताकि भारत की बढ़ती वायु शक्ति से ध्यान हटाया जा सके।

बाद में स्वतंत्र फैक्ट-चेक एजेंसियों ने भी इन दावों को झूठा करार दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इंटरनेट पर फैलने वाली गलत सूचनाएँ अक्सर राष्ट्रीय गौरव के क्षणों के बाद ही बढ़ाई जाती हैं।

राफेल से मजबूत हुई भारत की वायु शक्ति

भारत ने 59,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत फ्रांस से राफेल विमान खरीदे थे। इन विमानों की तैनाती ने देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा को नई मजबूती दी है, खासकर पश्चिमी और उत्तरी मोर्चे पर।

अब भारतीय वायुसेना 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद का प्रस्ताव रख चुकी है, जिससे भारत की वायु प्रतिरोधक क्षमता और भी बढ़ जाएगी।

एक तस्वीर, एक संदेश – साहस की नई पहचान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह की वायरल तस्वीर केवल एक औपचारिक क्षण नहीं थी, बल्कि यह भारत के नए युग का प्रतीक बन गई।
यह तस्वीर बताती है कि अब साहस किसी लिंग से नहीं बंधा और भारत की बेटियाँ भी सीमाओं के पार उड़ान भरने को तैयार हैं।

शिवांगी सिंह की कहानी सिर्फ एक फाइटर जेट उड़ाने की नहीं है, बल्कि सीमाओं को तोड़ने, रूढ़ियों को चुनौती देने और सपनों को साकार करने की कहानी है।

आज वे सिर्फ वायुसेना की नहीं, बल्कि पूरे देश की “गौरवमयी बेटी” बन चुकी हैं — जो यह साबित करती हैं कि अब आसमान ही सीमा नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।

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