केंद्रीय सरकार का 8वां वेतन आयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की संदर्भ शर्तों (Terms of Reference – ToR) को मंजूरी दे दी गई। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश एवं प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन न्यायमूर्ति रंजन गोगोई देशाई (Ranjana Prakash Desai) करेंगी। आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीनों के भीतर प्रस्तुत करनी होंगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन की सटीक तिथि अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी। उन्होंने कहा, “ज्यादातर संभावना है कि इसे 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा।”
सरकार के बयान के अनुसार, आयोग अपनी सिफारिशें देते समय देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) की आवश्यकता को ध्यान में रखेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकासात्मक व्यय और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें। इसके अलावा, गैर-अंशदायी (Non-Contributory) पेंशन योजनाओं की अवितरित लागत तथा राज्यों की वित्तीय स्थिति पर सिफारिशों के संभावित प्रभाव पर भी विचार किया जाएगा।
वेतन संरचना तय करते समय आयोग केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की वेतन, भत्तों और कार्य परिस्थितियों का भी अध्ययन करेगा।
सरकार ने बताया कि दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और संयुक्त परामर्श तंत्र (Joint Consultative Machinery) के कर्मचारियों से विस्तृत परामर्श किया गया।
आयोग की संरचना इस प्रकार होगी —
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई (पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश)
- आंशिक सदस्य: प्रोफेसर पुलक घोष (आईआईएम बेंगलुरु)
- सदस्य सचिव: पंकज जैन (पेट्रोलियम सचिव)
आमतौर पर प्रत्येक 10 वर्षों के अंतराल पर नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना था और उसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई थीं।
सरकार के अनुसार, आयोग की सिफारिशें देते समय न केवल केंद्र बल्कि राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर भी विचार किया जाएगा, क्योंकि प्रायः राज्य सरकारें कुछ संशोधनों के साथ इन सिफारिशों को अपनाती हैं।
सातवें केंद्रीय वेतन आयोग ने वेतन, भत्तों और पेंशन में 23.55% वृद्धि की सिफारिश की थी, जिससे केंद्र सरकार पर प्रतिवर्ष लगभग ₹1.02 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा था।
